*रंगा आसमां*

रंग दो अपने दिलों को,
कुछ इस कदर प्यार से
कि जैसे रंगा हो आसमां,
शाम की बहार से
ना कोई द्वेष हो मन में,
ना कोई दुर्भावना
स्नेह ही बरसे, चहुं ओर,
हो प्रेम की सद्भावना..

*****गीता

Comments

8 responses to “*रंगा आसमां*”

  1. Satish Pandey

    कवि गीता जी की खूबसूरत और बेहतरीन अभिव्यक्ति

    1. Geeta kumari

      ख़ूबसूरत समीक्षा के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी
      सादर आभार 🙏

    1. Geeta kumari

      Thanks pragya

  2. अति सुंदर

    1. Geeta kumari

      कविता की सराहना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ऋषि जी.

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत शुक्रिया आपका भाई जी 🙏

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