रक्तदान है महादान
यह ‘प्रज्ञा शुक्ला’ कहती है,
रक्ताल्पता को अक्सर
जीवन में अपने सहती है…
रक्तदान करने से कोई
कमजोरी नहीं आती है,
इतनी दुआएं मिलती हैं कि
झोली भर जाती है…
किसी की बुझती जीवन ज्योति को
रक्त देकर दीप्तिमान करो
रक्तदान कर हे मानव !
मानवता पर एहसान करो…
जाने कितने हैं प्राणी जो
रक्ताल्पता से मर जाते हैं,
रक्त ना मिलने के कारण
कितने दीपक बुझ जाते हैं..
हो यदि सक्षम तो हे मानव !
नियमित रूप से रक्तदान करो
सब यज्ञों से बढ़कर है तुम ये महादान करो…
“रक्तदान है महादान”
Comments
4 responses to ““रक्तदान है महादान””
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बिल्कुल सही बात है, रक्तदान से कोई कमजोरी नहीं आती है
बहुत सुंदर रचना -
रक्तदान महादान, बहुत ही सच्ची पंक्तियाँ
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बहुत खूब
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