रक्त से सनी धरती लाल देख

✍ ? गजल ?✍
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रक्त से सनी धरती लाल देख
चहुंओर हाहाकार हाल देख

समरसता जल रही धूं धूं कर
सद्भावना है बदहाल देख

हिंसा आतंक का है जोर प्रबल
छल-कपट का रुप विकराल देख

भयाक्रांत भयावह आज स्थिति
नैतिकता की घायल चाल देख

साम्प्रदायिकता बन बैठा है नाग
सव॔धर्म समभाव है तंगहाल देख

तू बन नही कायर आज अर्जुन
पुरुषार्थ जगा वक्त संभाल देख

श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ (छग)
✍?⭐??⭐?✍
(दिनांक 27-03-2018)

Comments

2 responses to “रक्त से सनी धरती लाल देख”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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