रवानी

‘तेरे एहसास में रहूँगा मैं असर बनकर,
या कभी दिल में ही साँसों की रवानी बनकर..
संभालकर मुझे रखना है इम्तेहान तेरा,
अब मैं रहूँगा तेरी आँखों में पानी बनकर..’

– प्रयाग

मायने :
रवानी – गतिशीलता

Comments

8 responses to “रवानी”

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    1. Prayag Dharmani

      धन्यवाद जी

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar

    सुन्दर प्रस्तुति

  3. बहुत ख़ूब

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