रहस्य

आ गया वक्त अब रहस्य उजागर करने का,
यथार्थ के चक्कर में समय ना बर्बाद करो।
साधक बनकर देश का कल्याण करो,
सांत्वना देकर परेशान आत्मा पर उपकार करो।।

✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

Comments

4 responses to “रहस्य”

  1. ये कविता तो नहीं है

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