17 Comments

  1. बहुत सटीक अभिव्यक्ति है सतीश जी ।कविता के माध्यम से आपने जो बात कही है, अक्सर मै भी ऐसा ही सोचा करती हूं। कथाओं के राक्षसों का ही कदाचित पुनर्जन्म हुआ है,इन्हे पहचानना होगा और इनके किए की सज़ा भी दिलवानी होगी ।अपने घृणित कृत्य के लिए ये राक्षस किसी की पूरी ज़िन्दगी कैसे छीन सकते हैं ।शानदार सोच और शानदार प्रस्तुति
    सैल्यूट सर 🙋 ।

    1. इस काबिलेतारीफ समीक्षा हेतु आपको बहुत बहुत धन्यवाद। वास्तव में राक्षस ही आज दरिंदों के रूप में उभरते हैं, वे समाज के लिए खतरा हैं। कविता की इतनी सुंदर व्याख्या हेतु सादर आभार , समीक्षा में सक्षम लेखनी की प्रखरता को अभिवादन

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