राखी ऑनलाइन

जीवन की आपाधापी में
त्यौहार सांकेतिक हो गए,
जबसे कोरोना आया है
तब से ऑनलाइन हो गए।
प्यार ऑनलाइन हो गया
मुलाकात ऑनलाइन हो गई,
राखी ऑनलाइन
कलाई ऑनलाइन हो गई
बस जज्बात ऑफ लाइन रह गए।

Comments

7 responses to “राखी ऑनलाइन”

  1. सही कहा आपने
    और ये सब हमारी सहूलियत के लिए ही है।

    1. सादर धन्यवाद

      1. Pragya Shukla

        🙏🙏

    1. सादर धन्यवाद जी

  2. Kumar Piyush

    Waah ji

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