तेरी यादों को सलाम करता हूँ
और अब मैं रात्रि को विराम देता हूँ।
नींदे है छत पर सोई हुई,
मगर मैं अपनी आँखों को आराम देता हूँ।
चलो ठीक है अब तुम्हारी यादों को
अलविदा करता हूँ और
रात्रि को विराम देता हूँ।
ओझल हो चुकी हैं पलकें मगर
नींदों का कुछ भी पता नहीं,
तुम्हारी यादों को छोड़कर मैं पीछे
ख्वाबों को सलाम करता हूँ।
चलो ठीक है अब तुम्हारी यादों को
अलविदा करता हूँ और रात्रि को विराम देता हूँ।
रात्रि को विराम
Comments
8 responses to “रात्रि को विराम”
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Nice
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🙏🙏
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Waah
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🙏🙏
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Good
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🙏🙏
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Good
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सुंदर
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