राष्ट्रपिता:-महात्मा गाँधी

दुबली-पतली कद काठी थी
धोती पहनकर चलते थे
आँखों में थे अनमोल सपने
ऐनक लगाकर चलते थे
राष्ट्रपिता थे प्यारे बापू
सबकी आँख के तारे थे
अंग्रेजों के छक्के छूटे
जब वह सत्याग्रह पर
जाते थे
पूरा देश था डटा हुआ
गाँधी जी के साथ खड़ा
हल्की-सी मुस्कान से वह
दुश्मन को मार गिराते थे
ना हथियार उठाते थे
अहिंसा के पुजारी थे
जब चलते थे वह
तन कर तो
दिल दुश्मन के हिल जाते थे..

Comments

3 responses to “राष्ट्रपिता:-महात्मा गाँधी”

  1. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की शारिरिक, चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए देश के लिए उनके द्वारा दिये गए योगदान का वर्णन करती सुन्दर रचना

Leave a Reply

New Report

Close