रिश्ते

रिश्ता होने से रिश्ते नहीं बना करते
निभाने से बनते हैं
जो रिश्ते बनते हैं दिमाग से
वह केवल बाजार तक चलते हैं
जो निभाए जाते हैं दिल से
वो आखरी सांस तक चलते हैं

Comments

7 responses to “रिश्ते”

  1. वाह अति सुंदर कविता है। कवि प्रज्ञा की बेहतरीन लेखनी से निकली मधुर संवेदना

  2. Geeta kumari

    अति सुन्दर भवाभिव्यांजना , सुंदर लेखन और शानदार प्रस्तुति

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