खाद्य-निरीक्षक की चलती थी,
रिश्वत से रोजी-रोटी
लाला ने इन्कार किया तो,
धमकी आ गई मोटी-मोटी
लाला जी के होटल में,
खाना बनता था शुद्ध
लेकिन बिन मोटी रिश्वत के,
अफ़सर हो गया थोड़ा क्रुद्ध
बोला, जांच कराऊंगा,
कैसा तेरा खाना है
ज़रा भी कमी मिली तो,
जेल में पक्का तेरा जाना है
लाला बोले, रहने दो धमकी,
खाना जांच कराओ कभी भी
नहीं डरें हम दादा-गिरी से,
काम करें ईमान-दारी से
खाना जांच हो कर आया,
बिलकुल शुद्ध खाना पाया
लाला जी की हुई जय-जयकार
हर्षित हुए सारे दुकानदार ।।
रिश्वत
Comments
4 responses to “रिश्वत”
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बहुत ही सुंदर कविता
इसे कहते हैं असत्य पर सत्य की विजय
👌👌👌👏👏👏-
धन्यवाद प्रज्ञा जी
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अतिसुंदर
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बहुत बहुत धन्यवाद भाई जी 🙏
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