रूपरेखा

ख़ुद पर ऐतवार कर पर भूलकर भी न किसी पर
विश्वास कर।
खुद के ही बल पर अपने जीवन की रूपरेखा तराश कर।।
कब कोई अपना,अपनी अंगुली को घुमा,तोहमत तुझपे लगा देगा
तेरी हर जायज़ कोशिश को भी, तेरी ही गलती बना देगा
अकेले ही रहने की आदत डाल, न अपनी भावनाओं से खिलवाड़ कर।।
देखो कैसी अजब घङी यह आई है,
अपनों से ही अपनेपन की लङाई है,
न स्वार्थ है फिर भी क्यूं ये खिंचाई है
मन है सूना- सूना, पलकें मेरी पथराई हैं
ख्वाइशो को आग लगी,‌कैसे क्यूं किस पर गुमान कर।।

Comments

7 responses to “रूपरेखा”

  1. Geeta kumari

    जीवन की कड़वी सच्चाईयों को बयान करती हुई हृदय स्पर्शी रचना

  2. Rajeev Ranjan Avatar
    Rajeev Ranjan

    जिद है अपनी अपनी सबकी
    कुछ को है अभिमान
    कुछ आदत के गुलाम
    फिर भी सब हैं सही
    सब का मालिक वहीं
    यही समझ कर सकी
    सभी को आदर देना है
    सब उसका ही खिलौना है

  3. Rajeev Ranjan Avatar
    Rajeev Ranjan

    नर हो न निराश करो मन को
    निज को समझो न औरों को

  4. Rajeev Ranjan Avatar
    Rajeev Ranjan

    बहुत सुंदर

  5. Satish Pandey

    देखो कैसी अजब घङी यह आई है,
    अपनों से ही अपनेपन की लङाई है,
    न स्वार्थ है फिर भी क्यूं ये खिंचाई है
    मन है सूना- सूना, पलकें मेरी पथराई हैं
    —– बहुत सुंदर रचना। बहुत सुंदर भाव। मन के कोमल भावों की सहज अभिव्यक्ति

  6. ख़ुद पर ऐतवार कर पर भूलकर भी न किसी पर
    विश्वास कर।
    खुद के ही बल पर अपने जीवन की रूपरेखा तराश कर।।
    कब कोई अपना,अपनी अंगुली को घुमा,तोहमत तुझपे लगा देगा
    Uttam

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