वजूद

लफ़्ज़ों की कमी थी आज शायद
या रूह में होने वाले एहसास की
💐💐💐💐💐💐💐💐
नही पता मुझको कहानी तेरी शायद
बस इतना जानती हूं कि वजूद को तेरे

💐💐💐💐💐💐💐💐
तूझसे ज्यादा जानती हूं शायद
ख्वाबबगाह में जो बसता है वो
💐💐💐💐💐💐💐💐💐
अलग सी खुमारी और कशिश शायद
मेरे रोम रोम में बसी है जो
💐💐💐💐💐💐
कैसे बताऊं तुमको क्या रूमानी एहसास है वो
कैसे यकीं दिलाऊं कितना रूमानी है वो
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
बिन फरेब कितना मासूम है वो
किसी ख्वाबगाह का सरताज हो शायद

Comments

7 responses to “वजूद”

  1. बहुत सुंदर

  2. सुंदर रचना

  3. सुन्दर रचना, सुन्दर भाव, बहुत खूब

  4. सावन पर आती रहिए

Leave a Reply

New Report

Close