रोक ले ओ ईश्वर !
कहर बरपाते अपने बूंद बाणों को..
रहम कर मानवता की उस चीख पर
जो दोनों हाथ ऊपर कर..
मदद को पुकार रही है.
तू इतना निष्ठुर नहीं हो सकता..
गलती मानवता का स्वभाव है
तू उसे बनाया ही ऐसा है.
तू इतना रौद्र रूप दिखायेगा
तो मानवता के लिए कहाँ ठौर है
अब चलने भी दे ….रेस्क्यू ओपरेशन
रोक ले अपनी प्रकृति की विनाशलीला को
रोक ले ओ ईश्वर !
कहर बरपाते अपने बूंद बाणों को..
रोक ले ईश्वर
Comments
4 responses to “रोक ले ईश्वर”
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अति वृष्टि को रोकने के लिए और मानव जीवन को बचाने के लिए प्रार्थना करती हुई अति उत्तम रचना, स्तरीय लेखन
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बहुत बहुत धन्यवाद गीता जी
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अति उत्तम चित्रण है।
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सादर धन्यवाद
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