नई रौशनी कर रही है
तेरा इंतजार यॅंहा ।
तू है वहाॅं,
उसे भी तेरा इंतजार है।
आजा लौट कर,
बहुत सुनहरी दुनियाँ है,
तेरे लिए सजाया है
प्रभु ने सुखद संसार यहाँ॥
____✍गीता
रौशनी…
Comments
6 responses to “रौशनी…”
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Great poem
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बहुत सुंदर
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बहुत सुंदर पंक्तियां
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बहुत खूब
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आएगा लौटकर वो
बस इक सूचना है
जीवन सदा है लेकिन
रूप बदलना है
कभी न कभी चलना है
इक पूर्व सूचना है -
सुंदर अभिव्यक्ति, गीता जी
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