फ्रिज में रखी शब्जी की तरह
धीरे धीरे खराब हो रही है
मेरी लय,
कल कहीं बेसुरा न हो जाऊं
पढ़ ले जल्दी से उन पंक्तियों को
जो मैंने
तेरे लिए लिखी हैं।
—- डॉ0 सतीश पाण्डेय, चम्पावत
उत्तराखंड
लय
Comments
10 responses to “लय”
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सब्जी । बहुत सुन्दर
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धन्यवाद जी
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वेलकम
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Shandar likha hai
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धन्यवाद
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Nice
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सादर धान्य
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सादर धन्यवाद जी
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good
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thank you
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