देखो चली नौजवानो की टोली।
खेलेंगे लाल फिर लहू की होली।।
चारो दिशाओं में गूंज रहा है।
इंक़िलाब जिंदाबाद की बोली।।
अग्निपथ पे चल पड़े है सपूत।
ललकारे छोड़ के आसमां में गोली।।
ललकार
Comments
7 responses to “ललकार”
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नौजवानों
चारों
गूंज रही
पड़े हैं।
सुन्दर चित्रण है।।-

Thanks
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Good
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Thanks
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🇮🇳🇮🇳👌👌
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इंकलाब जिंदाबाद
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इंकलाब जिंदाबाद बहुत ही सुंदर रचना देशभक्ति से ओतप्रोत
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