आखिरकार बुलंदियों का
आसमां पा ही लिया…
आखिरकार आसमां से
एक सितारा तोड़ ही लिया…
बिछ गये रंगीन पंखों की तरह ख्वाब मेरे,
आखिरकार लहरों ने किनारा पा ही लिया…
लहरों ने किनारा पा ही लिया…
Comments
7 responses to “लहरों ने किनारा पा ही लिया…”
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“बिछ गये रंगीन पंखों की तरह ख्वाब मेरे,आखिरकार लहरों ने किनारा पा ही लिया…”
अपने ख़्वाब पूरे होते हुए देखने की कवि की बहुत सुन्दर पंक्तियां
उल्लास के क्षण व्यक्त करती हुई बहुत सुंदर कविता-

सुंदर समीक्षा के लिये धन्यवाद
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बहुत सुंदर अभिव्यक्ति
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धन्यवाद
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मेंहदी को एक दिन रंग तो लाना ही था।
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सही कहा सर
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धन्यवाद
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