3 Comments

  1. “जाड़े में अमृत है अग्नि ये कहते वेद-पुराण है।
    ‘विनयचंद ‘त्योहार नहीं ये अग्नि का सम्मान है।।”
    लोहड़ी पर्व पर अग्नि जलाने की प्रथा को सम्मान रुप में दर्शाती हुई बहुत सुन्दर कविता

  2. खुशियाँ अपार है
    प्यार का त्योहार है।
    वेहरे बीच आग जली
    लोहड़ी की बहार है।।
    —– बहुत खूब, लोहड़ी को हार्दिक शुभकामनाएं

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