4 Comments

  1. अब सवेरा है, वो बात थी जो
    अब नहीं है। लौट आओ
    अब सवेरा है।
    ____जब जागो तभी सवेरा वाली कहावत को चरितार्थ करती हुई कवि सतीश जी की बहुत उत्तम रचना, बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

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