है हर तरफ़ शोर तबाही का
गुमराह है रूह, दबी हुई सी कहीं
डूब गया है सूरज उम्मीद का
लफ़्ज ढूढ रहे है बसेरा तबाही में कहीं
लफ़्ज ढूढ रहे है बसेरा तबाही में कहीं
Comments
6 responses to “लफ़्ज ढूढ रहे है बसेरा तबाही में कहीं”
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wah!
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thanks
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लफ़्ज ढूढ रहे है बसेरा …. Subhan Allah … kya baat hai Panna Saheb
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thanks sir
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Good
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Good
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