वजूद

मैं हूं अपने परिवार का हिस्सा
या फिर हूं बीते कल का किस्सा
खुद को पानी की तरह हर आकार में ढाल दूँ
अपनों के लिए खुद की इच्छाओं को टाल दूँ
पहचान बनाने के वास्ते
करू मैं जतन सभी
ढूंढूँ मंजिल पाने के रास्ते
क्या मिलेगा मुझे वजूद कभी?
पिता से मिला मुझे नाम
सिर्फ पुत्री ही बनकर रह गई
पति से मिला उपनाम
घर में ही मेरी पहचान खो गई.

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