वतन पे है नजर जिसकी बुरी उसको मिटा देगें,,,
सबक ऐसा सिखा देगें कि धड से सर उडा देगें।।
जहाँ पानी बहाना है वहां पर खून देगें हम,,,
वतन से प्यार कितना है जहाँ को हम दिखा देगें।।
हजारो साल काटे हैं गुलामों की तरह हमने,,,
नहीं अब और सहना हैं ये दुनिया को बता देगें।।
कसम है उन शहीदों की लुटा दी जान सरहद पे,,,
उसी रस्ते चलेंगे और अपना सर कटा देगें।।
हमारे गाँव का बच्चा नहीं है कम किसी से भी,,,
जहाँ भी पावं रख देगें वहां धरती हिला देगें।।
समन्दर कांप जाएगा ये दरिया सूख जाएगा,,,
कि ऐसी आग भर देगें सभी मुर्दे जगा देगें।।
मेरा हर शब्द अगांरा मेरा हर लफ्ज़ है बिजली,,,
जहाँ दुश्मन दिखा हमको ‘लकी’ उसको जला देगें।।
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