Tag: गणतंत्र दिवस पर कविताएं

  • प्राण से प्यारे गणतंत्र

    प्राण से प्यारे गणतंत्र,
    पल पल कोटि कोटि प्रणाम।

    “**फूली नहीं समाती,**
    छब्बीस जनवरी।
    खुशियों के गीत गाती
    छब्बीस जनवरी ।

    गांधी भगत बिस्मिल ,
    आजाद बोस की,
    कुर्बानियाँ सुनाती ,
    छब्बीस जनवरी ।

    रक्षा करने स्वदेश की ,
    हँसते हँसते सर्वस्व लुटाते हैं ।
    उन अमर शहीदों को ,
    स्वदेशवासी श्रद्धानत होकर शीष झुकाते हैं।

    देशवासियों को शुभकामनाएँ, बधाइयाँ।

    सविनय,
    आप सभी का मित्र
    जानकी प्रसाद विवश

  • वतन

    मेरी ग़ज़ल ” वतन” को पढे मेरी प्रोफाईल पर ।और कमेन्ट जरूर करे आपका लकी

    वतन

  • सबसे बढ़कर देश की शान

    छोड़ चुके थे, जीवन अपना
    जीने की वो आशा मे।
    तोड चुके थे, अपना हर सपना
    सपनो की वो, आशा मे।
    अनेक हुए बलिदान ओर,
    कई ने दे दी अपनी जान
    लेकिन ठान उन्होंने रखा था कि,
    सबसे बढ़कर देश की शान।
    न देखा था धर्म उन्होंने,
    न ही किया था, जातिवाद
    उखाड़ उन्होंने फैका था,
    इस भूमि से आतंकवाद।
    तब स्वतन्त्र हुआ था, भारत मेरा
    पर कुछ लोगो ने इसे फिर बखेरा।
    अब तो शहीदो की भांति हसते – हसते दे दूंगा अपनी जान
    क्योंकि सबसे बढकर मेरे देश शान।

  • Shayari

    किशतो मे बटी है जिंदगी-
    खुशी की कमी
    गम की किशते
    कुछ ज्यादा हैं….!!!
    -Aakanksha?

  • गणतंत्र दिवस है देखो आया

    गणतंत्र दिवस है देखो आया
    झंडा हम फहरायेंगे
    अपने शहीदों को याद कर
    श्रद्धा सुमन चढ़ाएंगे
    गणतंत्र दिवस…..
    अपने देश में भारत माँ के
    नारे हम लगाएंगे
    शहीदों की बलिदानी को
    बच्चों को बतलायेंगे
    गणतंत्र दिवस …….
    26 जनवरी 1950 को
    गणराज्य हमारा लागू हुआ
    संविधान में अधिकार को पाकर
    कर्तव्यों का साथ निभाएंगे
    गणतंत्र दिवस…….
    प्रथम बार जब राजेंद्र जी ने
    झंडा जो फहराया था
    गौरवान्वित हुआ था भारत
    वैसे ही हम भी मनाएंगे
    गणतंत्र दिवस ……..
    इस बार हम 68वां
    गणतंत्र दिवस मनाएंगे
    सारे देश मे गणराज्य का
    डंका हम बजायेंगे
    गणतंत्र दिवस……..।।

  • Jai hind

    सूरज ऊगा था, उस दिन कुछ ऐसा
    नया जीवन मिला हो , लगा था कुछ वैसा
    आज़ाद पंछी की तरह जब ली थी साँस सबने,
    ना होगा स्वर्ग भी इस सुख के जैसा
    पर फिर भी तो था कुछ अधूरा उस पल भी,
    अम्बेडकर जैसे महान लोगो ने सोचा की
    कुछ तो होगा इसका हल भी
    तब रच डाला उन्होंने कुछ ऐसा इतिहास
    कि देश में इससे ज्यादा ना है अब कुछ ख़ास
    आजादी के उस दिन को हम गर्व से बुलाते है स्वतंत्रता दिवस
    पर स्वतंत्रता का मतलब ही नही रह जाता
    अगर ना मनाता हो कोई धूम धाम से अपना गणतंत्र दिवस ।
    – अंकित सिंह डाँगी (अंकु)

  • वतन

    वतन पे है नजर जिसकी बुरी उसको मिटा देगें,,,
    सबक ऐसा सिखा देगें कि धड से सर उडा देगें।।

    जहाँ पानी बहाना है वहां पर खून देगें हम,,,
    वतन से प्यार कितना है जहाँ को हम दिखा देगें।।

    हजारो साल काटे हैं गुलामों की तरह हमने,,,
    नहीं अब और सहना हैं ये दुनिया को बता देगें।।

    कसम है उन शहीदों की लुटा दी जान सरहद पे,,,
    उसी रस्ते चलेंगे और अपना सर कटा देगें।।

    हमारे गाँव का बच्चा नहीं है कम किसी से भी,,,
    जहाँ भी पावं रख देगें वहां धरती हिला देगें।।

    समन्दर कांप जाएगा ये दरिया सूख जाएगा,,,
    कि ऐसी आग भर देगें सभी मुर्दे जगा देगें।।

    मेरा हर शब्द अगांरा मेरा हर लफ्ज़ है बिजली,,,
    जहाँ दुश्मन दिखा हमको ‘लकी’ उसको जला देगें।।

  • बात करूँगा दिल से दिल को छू कर

    बात करूँगा दिल से, दिल को,
    छू कर जाने वालों की,
    आजादी की जंग में शामिल दिलवाले दीवानों की,
    आजाद,भगत सिंह, राज गुरु और झांसी वाली रानी की,
    बात करूँगा दिल से, दिल को,
    छू कर जाने वालों की,
    स्वतंत्र राज, गणतन्त्र मन्त्र की माला जपने वालों की,
    लोकतन्त्र के हित में जमकर मन्थन करने वालों की,
    बात करूँगा दिल से, दिल को,
    छू कर जाने वालों की,
    2 वर्ष 11 माह दिन 18 में
    संविधान की रचना करने वाले की,
    संसद् पर अपनी शान तिरंगा, प्रथम फहराने वालों की,
    मूल बीज मौलिक अधिकारों का बोध कराने वालों की,
    बात करूँगा दिल से, दिल को,
    छू कर जाने वालों की,
    ये बेला है शहीदी के रंग से माँ का चोला रँगने वालों की,
    गणतंत्र दिवस की मशाल समय पर हाथों में उठाने वालों की,
    बात करूँगा दिल से, दिल को,
    छू कर जाने वालो की।।

    ~ राही (अंजाना)

  • गणतंत्र दिवस

    गणतंत्र दिवस की अरुणिम उषा में,
    राजपत की छवि निराली ,
    हर रंगों की वेशभूषा में ,
    भारत माता की छवि है प्यारी ,
    उस पर तिरंगे का नील गगन में लहराना ,
    जय हिन्द .जय भारती की,
    स्वरलहरी से गुंजित दिशाएं ,
    हर जन के मन में,
    भारतवासी होने का अभिमान जगाए।

    भारत माँ के हर अंगों की,
    छटा बड़ी मनोहारी है,
    रंग – बिरंगे फूलों के अलंकार ने,
    अद्धभुत छटा बनाई है।

    भारत की सुंदरता गणतंत्र की ,
    प्रजातंत्र में समायी है ,
    गणतंत्र के नियमों की ,
    सजदे करते यहाँ सब भाई हैं ,
    भाई-चारे , सौहार्द की सौगात ,
    हमने धरोहर में पाई है।

    ये धरोहर न लुटने पाए ,
    गणतंत्र के नियमों तले ,
    हर क्यारी फुले -फले,
    इन्द्रधनुषी रंगों में ,
    भारत माता यूँ हीं सजती रहें।.

    आओ हम सब मिलकर ,
    भारत माँ के अलंकार बनें ,
    तिरंगे की शान में ,
    चाँद-सितारों के अरमान भरें ,
    अपने गणतंत्र पर अभिमान करें।

  • 26 जनवरी

    ….गणतंत्र दिवस….
    लो फिर आ गई २६ जनवरी,
    नौजवानों को समझाने,
    क्या होता गणतंत्र ये,
    बलिदानों का गुण गाने,
    आज के हर युवा का फ़र्ज़ है ये,
    उन संघर्षों, उन वीरों को पहचानें,
    मौत चली थी श्रद्धा से जिनकी,
    हिम्मत को आज़माने,
    ……………
    जब देश मेरा परतंत्र था,
    हर वाशिंदे के मन में रंज था,
    आज़ादी के परवानों ने,
    गुलामी की नीव हिला दी,
    देश छोड़ अंग्रेज़ भागे जब,
    वीरों ने जिद की ठानी,
    ….
    नया सबेरा नई चमक,
    आज़ादी की हवा में घुली महक,
    फिर संविधान हमारा रचा गया,
    हर जाति, धर्म, हर नागरिक को,
    उसके अधिकारों, कर्तव्यों से भरा गया,
    ……
    ये संविधान समुद्र सा विशाल है,
    इसी के हाथों में लोकतंत्र की कमान है,
    भिन्न जाति, धर्मों, भाषाओं का,
    रंग-बिरंगा है भारत,
    पार लगाता सब की नैया,
    हम भारतवासी का यही खेवैया,
    ……
    गणतंत्र हमारा महान है,
    कौन हमारा मंत्री हो,
    कौन हो प्रधान उप मंत्री,
    चुन सकें हम अपना नेता,
    हमको चुनाव का अधिकार है,
    ……
    डॉ भीमराव अंबेडकर की अध्यक्षता में
    २ वर्षों में इसका निर्माण हुआ,
    २६ जनवरी १९५० में इसका अंगीकार हुआ
    हम गणतंत्र देश के वासी अब,
    कर्तव्यों की भी रखते ज़िम्मेदारी,
    संविधान करता है हमारे,
    अधिकारों की पहरेदारी!!!
    …..
    आओ करें गणतंत्र दिवस की तैयारी,
    आगे बढ़कर चलो करें प्रतिज्ञा,
    संभली रहे आज़ादी की धरोहर,
    कभी न फिर वापस आए,
    गुलामी की ये बीमारी…
    ..मनीषा नेमा..

New Report

Close