होली के रंगों सी मुस्कुराए,
दीवाली के दीपों सी जगमगाए,
बेटी बनकर घर महकाती है,
बहन बनकर लुटाती है स्नेह
बनकर वनिता और वधू
दूजे का घर अपनाती है।
प्रयत्न करती है,सबको सुख देने का,
प्रेम से उस घर को अपना बनाती है।
दे कर जन्म इन्सान को,
उसे इन्सानियत सिखाती है।
प्रभु की नेमत है वह,
रचती सृष्टि सारी है,
ज़रा से प्यार के बदले,
सर्वस्व लुटा दे, वह नारी है।।
______✍️गीता
*अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं*
वह नारी है
Comments
3 responses to “वह नारी है”
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उपमा अलंकार से सजी सम्मूर्णता लिए रचना
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धन्यवाद प्रज्ञा
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Welcome di
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