वाणी

मानव का गहना है वाणी,
वाणी का भोगी है प्राणी ।
मधुर वचन है मीठी खीर,
कटु वचन है चुभता तीर ।
सद वचन है सदा अनमोल,
मन कांटे से इसको तौल ।
हिय का रूप है वाणी,
ये बहु चंचल बहता पानी ।
मानव का गहना है वाणी,
वाणी का भोगी है प्राणी ।
डूबते का सहारा मधु वाणी,
हँसते का घातक कटु वाणी ।
सदाचार की पोषक सद वाणी,
दुराचार की पोषक दुर्वाणी ।
शत्रु नाशक है मधु वाणी,
शत्रु पोषक है कटु वाणी ।
मानव का गहना है वाणी,
वाणी का भोगी है प्राणी ।
जख्म को भर दे मधु वाणी,
जख्म नासूर कर दे कटु वाणी ।
मानव का गहना है वाणी,
वाणी का भोगी है प्राणी ।

Comments

3 responses to “वाणी”

  1. Geeta kumari

    वाणी पर बहुत ही सुन्दर कविता ,एक दम सत्य.

  2. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर रचना

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