4 Comments

  1. इसी को कहा गया है सर..
    कहीं धूप कहीं छाया
    यही है ईश्वर की माया..
    अत्यन्त संवेदनशील एवं यथार्थ रचना जिसकी समीक्षा करने में मैं असमर्थ हूँ…😯😯😯

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