विदाई
कर चले मेरी महफ़िल को सूना
क्या खता हो गई आज मुझसे,
इस तरह क्यों चले जा रहे हो
क्या खता हो गई आज मुझसे।
जिंदगी भी समझ से परे है
समझ से परे है विदाई,
साथ रहते हैं, जीते हैं लेकिन
एक दिन छीन लेती विदाई।
दूर होना सभी को है लेकिन
कौन रोकेगा ह्रदय के गम को,
थाम लूंगा कलेजा स्वयं का
थाम पाउँगा मुश्किल से मन को।
—- डॉ. सतीश पांडेय
बिछोह पर बहुत ही सुंदर पंक्तियां
सादर आभार व्यक्त करता हूँ
Atisunder
सादर धन्यवाद जी
नाइस
Thank you
वियोग रस का सुन्दर प्रयोग