तुम्हारा सहयोग,
तुम्हारा प्रेम पाकर
मैं कृतार्थ हुई
मैं तुम्हारे सहयोग की आभारी हूं
तुम्हारा सहयोग,
तुम्हारी संवेदनाएं,
तुम्हारी भावनाएं
तुम्हारे लफ्जों में यूं ही
बलवती होती रहे
मैं तुम्हारा सम्मान करूंगी
तुम्हारे मन में भी
मेरे सम्मान की बातें चलती रहे
जब तुम मेरा हर कदम पर
साथ दोगे
तो भला मैं पीछे कैसे रहूंगी
तुम्हारी अर्धांगिनी हूं मैं
तुम्हारे हर सुख दुख में
तुम्हारा साथ दूंगी।।
विदिशा एक अर्धांगिनी :-हर कदम पर तुम्हारा साथ दूंगी

Comments
6 responses to “विदिशा एक अर्धांगिनी :-हर कदम पर तुम्हारा साथ दूंगी”
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वाह बहुत सुंदर
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धन्यवाद आदरणीय
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वाह ।बहुत ही सुन्दर।
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Thanks
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बहुत सुंदर लेखन
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धन्यवाद आपका
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