विश्व समर जीत

जाग हे पार्थ जाग तू,
दे काल को अब मात तू,
काल के कपाल पर अमिट रेखाएं खींच,
अब तू काल समर जीत।
स्वयं के सम्मान हेतु ,
विश्व के कल्याण हेतु ,
अपने अंदर के ज्वाल पुष्प को तू सींच,
अब तो दिव्य समर जीत ,
अब तो विश्व समर जीत ।।
हो रही हूंकार है ,
उठ रही तलवार है,
गांडीव के बाण से ,
विश्व के इतिहास में ,
गाथा नवीन लिख।
उड़ उड़ान बाज की ,
हुंकार हो वनराज की,
हर संकट में बने कठिनाई तेरी मीत,
अब तू धर्म समर जीत।
अब तो विश्व समर जीत।।

Comments

10 responses to “विश्व समर जीत”

  1. Amritanshi Pandey

    Thankyou sir

  2. Ayush Maurya

    Nice poem keep it up👍👍

    1. Amritanshi Pandey

      @ayush maurya….thankyou so much

  3. Rakhi Gupta Avatar
    Rakhi Gupta

    nice

    1. Amritanshi Pandey

      @Rakhi gupta…thankyou maam

  4. विश्व पर अच्छी रचना

  5. Satish Pandey

    Nice कविता

Leave a Reply

New Report

Close