ॠणी आपके हैं हम सभी,
त्याग, तप, पौरूष की गाथा
भूलेगे ना कभी ।
28 सितम्बर, 1907 का
था वो पावन दिवस
बसंती चोला धारी, वीर क्रांतिकारी,
सेनानी भगतसिंह का पंजाब की ,
पावन धरा पर हुआ अवतरण,
इनके जन्म को हम
भूलेगे ना कभी।
इनकी जयन्ती पर
है इन्हें कोटि-कोटि नमन
जिनकी वीरता की गाथा से
परचित है नीला गगन
अभूतपूर्व साहस थी उनकी
भूलेंगे ना कभी ।
देशभक्ति के भावों के धनी,
अंग्रेजी हुकूमत से ना जिनकी बनी
“नौजवान भारत सभा”
की स्थापना कर, विद्रोह की बिगुल से
अंगेजो की मनसा भेद दी
सोये हुओ में अपनी गतिविधियों से
नवचेतना की बीज सीच दी
उनकी संजीदा कोशिशों को
भूलेगे ना कभी ।
साण्डर्स की हत्या कर
सशस्त्र क्रांति की आगाज़ की
असेम्बली में बम विस्फोट कर
भारतीयों में मर मिटने की
नव भावना की शुरुआत की
उनके अथक प्रयासों को
भूलेगे ना कभी ।
23 मार्च 1931 का
वह काला दिवस,
फाँसी पर चढ़, जिन्दगी
अपने वतन को दान दी
सीख दे गये हमें
मरकर भी करना हिफाज़त
अपने देश की आन की
उनके शौर्य की गाथा
भूलेंगे ना कभी ।
श्रद्धा सुमन अर्पित है वीर भगत सिंह को!
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