कौन कहता है कि मेरे
सगे भाई नहीं हैं
इसलिए राखी पर रोऊँगी।
वे लाखों वीर सिपाही
मेरे ही तो भाई हैं
जो भारत मां की रक्षा को
निडर खड़े हैं सीमा पर,
उनको मैं राखी भेजूंगी,
असली रक्षक तो वे ही हैं।
उनको ही राखी भेजूंगी।
वीर सिपाही
Comments
10 responses to “वीर सिपाही”
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कवि ने अपने कोमल भावों को व्यक्त किया है भावपक्ष 👌👌
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धन्यवाद जी
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अति सुंदर विचारों से परिपूर्ण सुंदर रचना।
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धन्यवाद जी
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Shandar
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धन्यवाद जी
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सुन्दर
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Dhanyvaad
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सुन्दर
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धन्यवाद
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