वीर सिपाही

कौन कहता है कि मेरे
सगे भाई नहीं हैं
इसलिए राखी पर रोऊँगी।
वे लाखों वीर सिपाही
मेरे ही तो भाई हैं
जो भारत मां की रक्षा को
निडर खड़े हैं सीमा पर,
उनको मैं राखी भेजूंगी,
असली रक्षक तो वे ही हैं।
उनको ही राखी भेजूंगी।

Comments

10 responses to “वीर सिपाही”

  1. कवि ने अपने कोमल भावों को व्यक्त किया है भावपक्ष 👌👌

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद जी

  2. Geeta kumari

    अति सुंदर विचारों से परिपूर्ण सुंदर रचना।

    1. धन्यवाद जी

  3. Raju Pandey

    Shandar

    1. धन्यवाद जी

    1. Satish Pandey

      Dhanyvaad

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद

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