8 Comments

    1. धन्यवाद आपका इतने स्नेह के लिए….
      यदि आपको ये कविता वाकई में पसंद आई है

  1. कवि प्रज्ञा जी ने अपने कविता से बहुत ही प्रभावित किया है ।
    लेकिन हम सोच रहे थे कि ये कविता हमें 2050 में पढ़ने को मिलेगी
    चलो जल्दी ही मिल गई , बहुत सुंदर शिल्प और बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति ।

  2. क्या बताएं तुम्हें टिंकू !
    कभी हम भी जवान हुआ करते थे !!
    हमारी मोहब्बत के किस्से
    तमाम हुआ करते थे…..
    एक युवा कवि द्वारा वृद्धावस्था की स्थिति और उसमें सौंदर्य के संस्मरण का सुंदर चित्रण। यह दुरूह कार्य था, लेकिन कवि प्रज्ञा द्वारा उसे सुन्दर तरीक़े से प्रस्तुत करने में सफलता पाई है।

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