व्यापार

दिल की जो बातें थीं सुनता था पहले,
सच ही में सच था जो कहता था पहले।
करने अब सच से खिलवाड़ आ गया,
लगता है उसको व्यापार आ गया।

कमाई की खातिर दबाता है सब को ,
गिरा कर औरों को उठता है खुद को।
कि जेहन में उसके जुगाड़ आ गया,
लगता है उसको व्यापार आ गया।

मुनाफे की बातें ही बातें जरूरी।
दिन में जरूरी , रातों को जरूरी।
देख वायदों में उसके करार आ गया,
लगता है उसको व्यापार आ गया।

मूल्यों सिद्धांतों की बातें हैं करता,
मूल्यों सिद्धांतों की बातों से डरता,
कथनी करनी में तकरार आ गया,
लगता है उसको व्यापार आ गया।

नहीं कोई ऐसा छला जिसेको जग में,
शामिल दिखावा हर डग, पग, रग में।
जब करने अपनों पे प्रहार आ गया,
लगता है उसको व्यापार आ गया।

पैसे की चिंता हीं उसको भगाती,
दिन में बेचैनी , रातों को जगाती।
दौलत पे हीं उसको प्यार आ गया,
लगता है उसको व्यापार आ गया।

अजय अमिताभ सुमन:सर्वाधिकार सुरक्षित

Comments

7 responses to “व्यापार”

    1. Ajay Amitabh Suman Avatar
      Ajay Amitabh Suman

      Thanks

    1. Ajay Amitabh Suman Avatar
      Ajay Amitabh Suman

      Thanks

    1. Ajay Amitabh Suman Avatar
      Ajay Amitabh Suman

      आपका आभार देवेश जी

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