किसी को भूल जाने मे वक़्त तो लगता है
के आँखों के आंसू मिटाने में वक़्त तो लगता है
जब बैठे हो चाहत-ऐ-किस्ती मे, तो सब्र करो
इसको साहिल तक पहुचाने में वक़्त तो लगता है
क्यों रोते हो अब अपने ही किये हुए उस काम पर
गमो के दिन बिताने में वक़्त तो लगता है
धीरे-धीरे भरेंगे, के ये गम और आंसू से बने है
जख्म को भर जाने में वक़्त तो लगता है
ए दिल ज़रा ठहर जा, ज़रा तस्सली रख
किसी शहर जाने में वक़्त तो लगता है
चलो मान लिया ये दरिया गहरा है लेकिन
किसी की गहराई नापने में वक़्त तो लगता है
तुम्ही ने कहा था एक दिन उसको मोहोब्बत जरूर होगी
के किसी के दिल में जगह बनाने में वक़्त तो लगता है
लौट जाऊँगा में भी इस शहर से लेकिन
खुद को तालुक सब से करने में वक़्त तो लगता है
इतनी जल्दी कहा ख़ाक होता है कोई
खुद को जलने में वक़्त तो लगता है
ये दिल भी एक कच्ची बस्ती है लोगो
बस्तियां बसने में वक़्त तो लगता है………………!!
D K
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