शहादत को नमन

शत्रु को तोड़ कर लेटा,
तिरंगा ओढ़ कर बेटा
भारत मां की हर मां का ,
सीना फटता जाता है
जब किसी का लाल तिरंगा ,
ओढ़ के आता है
बूढ़े बाप ने देखा जब,
तो आंखों से आंसू निकल गए
बोला मेरी लाठी टूटी,
कैसे अब जिया जाए
दो मासूम पूछे मां से,
पापा क्यों खामोश से हैं
हमें पुकारते भी नहीं है,
नींद में क्यों आए हैं
पत्नी का सिंदूर मिटा जब,
मुंह को कलेजा आ गया
बिंदी भी हटा दी उसकी,
कंगन भी उतार दिया
आंखें सबकी हो गई नम,
तिरंगे में लिपट कर जो आए
उनकी शहादत को नमन

*****✍️गीता

Comments

6 responses to “शहादत को नमन”

  1. आपकी सबसे मार्मिक रचना
    यह सत्य किसी से नहीं छुपा कि एक सैनिक जब शहीद होता है तो उसके परिवार पर क्या गुजरती है

    1. समीक्षा के लिए धन्यवाद प्रज्ञा जी

  2. प्रणाम🙏 💐

    1. Geeta kumari

      🙏🙏

    1. बहुत-बहुत धन्यवाद भाई जी🙏

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