शायरी (जाने माने)

जिन्हें समझते थे हम औरों से अलग,
वो भी आज, ज़माने से निकले।
जिनसे थी हमें चन्द खुशियों की आरज़ू,
वो भी आज ,दर्द के जाने माने से निकले।

Comments

12 responses to “शायरी (जाने माने)”

  1. Satish Pandey

    वाह वाह

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      🙏🙏🙏

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      🙏🙏🙏

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      🙏🙏

  2. बहुत ख़ूब

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      🙏🙏

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      🙏

  3. Pratima chaudhary

    वाह। बहुत खूब।

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    धन्यवाद

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