दर्द ए इश्क़ और शराब!
दोनों एक जैसे हैं, जनाब!
नशा चढ़ने पर,
ज़माना फर्जी सा लगता है।
शायरी (दर्द ए इश्क़ और शराब)
Comments
7 responses to “शायरी (दर्द ए इश्क़ और शराब)”
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waah waah
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Thank you sir 🙏
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Nice
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Thank you
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सुंदर
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🙏
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सुन्दर प्रस्तुति
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