कलम भी वही है दावात भी वही है।
दिल में भरे मेरे जज़्बात भी वही है ।।
लिखना चाहूँ मै एक गजल आप पर
पर क्या करे अपनी मुलाकात नहीं है।।
शायरी
Comments
10 responses to “शायरी”
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बहुत खूब भाई जी
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शुक्रिया बहिन
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जज्बात बयां करने के लिए
मुलाकात होना जरूरी नहीं है,
जब दिल से दिल का मिलन है तो कैसी दूरी है???
भाव की प्रधानता एवं शिल्प भी सराहनीय है-
बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी
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क्या खूब कहा है आपने
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धन्यवाद श्रीमान्
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वाह पंडित जी बहुत ही सही फरमाया आपने।
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बहुत बहुत धन्यवाद
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शुक्रिया
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