शायरी

कलम भी वही है दावात भी वही है।
दिल में भरे मेरे जज़्बात भी वही है ।।
लिखना चाहूँ मै एक गजल आप पर
पर क्या करे अपनी मुलाकात नहीं है।।

Comments

10 responses to “शायरी”

  1. बहुत खूब भाई जी

    1. शुक्रिया बहिन

  2. जज्बात बयां करने के लिए
    मुलाकात होना जरूरी नहीं है,
    जब दिल से दिल का मिलन है तो कैसी दूरी है???
    भाव की प्रधानता एवं शिल्प भी सराहनीय है

    1. बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी

  3. Virendra sen Avatar

    क्या खूब कहा है आपने

    1. धन्यवाद श्रीमान्

  4. Praduman Amit

    वाह पंडित जी बहुत ही सही फरमाया आपने।

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

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