शायर
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शब्दों के तीरों से भरे तरकश सा
व्यवहार करते हैं…
शायर भी क्या खूब यार करते हैं।
एक एक तीर से घायल हजार करते हैं,
अपने टूटे दिल के टुकड़े समेटकर,
जख्मों की स्याही में डुबो कर,
रचनाएं तैयार करते हैं।
शायर भी क्या खूब प्यार करते हैं।
एक एक नग्म,एक एक गज़ल में
कहीं ना कहीं उन टुकड़ों को
खूबसूरती से छुपा,
अपने दिल को तार-तार करते हैं।
शायद भी क्या खूब यार करते हैं।
दूर चलते किसी दिये से
तेल और काजल चुरा,
स्याही तैयार करते हैं।
फिर अपने शब्दों की बेचैनी
कागज पर उतार
सुकून इख्तियार करते हैं।
शायर भी क्या खूब वार करते हैं।
पूरी जिंदगी का हिसाब किताब कर
उस बला को किसी ना किसी बहाने याद
बार-बार करते है,
अपने आक्रोश, उन्माद,प्रेम को
रचनाओं में दफना कर फरियाद करते हैं।
शायरी भी क्या खूब यार करते हैं।
दिल के टुकड़े हजार करते हैं,
राहत और बेचैनियों का व्यापार करते हैं
मील का पत्थर बन जाए
ऐसी रचनाओं को तैयार करते हैं।
शायर भी क्या खूब यार करते हैं।
मेरा प्रणाम ऐसे सभी शायरों को
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
निमिषा सिंघल
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