शिकवा है मुझे उससे, जिसने लिखी हैं अधूरी कहानियां,
क्यों कराया था मिलन, गर परवान- ए- मोहब्बत की औकात ना थी।
AK
शिकवा
Comments
4 responses to “शिकवा”
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उपर वाला कब क्या करता है क्यो करता है कौन जान सका है भाई
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Sunder
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सुन्दर प्रस्तुति
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बहुत ही सुंदर, वाह
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