शेर(चाह)

वैसे नींंद नहीं आती ,
आजकल मुझे।
जबसे देखा हैं , हमदम तुझे
किस्मत में हैं, या नहीं तू
पर कोशिशें  करता हूँ ,
अब सो जाने की
काश इक पल सपनों में ही ,
मिल जाए तू मुझे ..!

Comments

5 responses to “शेर(चाह)”

  1. Satish Pandey

    बहुत खूब

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    🙏 धन्यवाद

  3. Pratima chaudhary

    बहुत खूब

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