शेर व ग़ज़ल

कहीं हीर की टोली तो कहीं रांझे की टोली।
अंजुमन में गूंज उठा शेर व ग़ज़ल की बोली।।

Comments

2 responses to “शेर व ग़ज़ल”

  1. बहुत सुन्दर

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