श्रद्धान्जली

आपके चरण कमल में
करती हूँ श्रद्धांजली अर्पण
भारत माँ के प्रति
आपके प्रेम का
कर पाएगा
कौन वर्णन ।
जन्म दिवस है
वर मांगती हूँ मैं
मुझमें भी भाव हो
आपके जैसा
मन में हो मेरे
आपसा समर्पण ।
भारतीय जनसंघ को
नवरंग से भरकर
बिखरते दलों को
भाजपा का रूप देकर
दिखलाया निज दर्शन ।
रचयिता बने उस दल का
वतन को शिखर पर पहुँचाया
कभी कवि हृदय ने
मौत को भी चुनौती देके आया
वरणीय है आपका तर्पण ।

Comments

9 responses to “श्रद्धान्जली”

  1. बहुत ही सुंदर रचना

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  2. Geeta kumari

    सुंदर अभिव्यक्ति

    1. सादर आभार गीता जी

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

  3. बहुत खूब
    मेरा भी नमन

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