श्रमिक

ईमानदारी से
करते हैं श्रम
ये है श्रमिक
जितनी प्रशंसा करे
उतना है कम
ऊँची ऊँची इमारतें बनाते हैं
सड़क पुल बनाते हैं सुधारते हैं
करते हैं खून पसीना एक
अपने परिश्रम से
दो वक्त की रोजी रोटी
जुटाते हैं
प्रतियोगिता के इस दौर में
बहुत पिछड़ जाते हैं
इनका भी है महत्व
नीव के पत्थर की तरह
पहचान बनाते हैं
करते हैं परिश्रम और
स्वास्थ्य लाभ का
उपहार पाते हैं
गंदगी का शिकार हो रही
धरती पर झाडू चलाते हैं
इनके सम्मान में
श्रमिक दिवस
मनाते हैं

Comments

4 responses to “श्रमिक”

  1. Amita Gupta

    बहुत सुंदर रचना

  2. बहुत ही सधे शब्दों में श्रमिकों पर लिखा है कवि ने,
    उच्चकोटि की रचना

  3. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

  4. Ekta Gupta

    बहुत सुंदर रचना

Leave a Reply

New Report

Close