अपनी राहों को पकड़, चल मंजिल की ओर,
पकड़े रख मजबूत हो, सच्चाई की डोर,
सच्चाई की डोर, तुझे ऊंचाई देगी,
नहीं हारने देगी जीत कदम चूमेगी,
कहे लेखनी छोड़, तुझे क्यों चिंता रखनी,
सच्चा व्यक्ति सदा, पाता है मंजिल अपनी।
सच्चाई की डोर
Comments
7 responses to “सच्चाई की डोर”
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बहुत सुंदर रचना, वाह
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सच्चाई की डोर, तुझे ऊंचाई देगी,
नहीं हारने देगी जीत कदम चूमेगी,
**********भावी पीढ़ी को सच्चाई की राह पर अग्रसर रहने को प्रेरित करती है हुई कवि सतीश जी की बेहतरीन रचना ।आप बहुत सुंदर साहित्य दे रहे हैं समाज को सर ।छंद शैली की विशेषता लिए हुए अद्भुत कृति। -

वाह बहुत बढ़िया रचना
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बहुत श्रेष्ठ रचना
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बहुत सुन्दर रचना
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बहुत सुंदर रचना
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अति सुंदर रचना
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