14 Comments

  1. देशप्रेम की आपकी संवेदना बहुत ही काबिलेतारीफ है सुमन जी, आप बहुत ही नपा-तुला औऱ बेहतरीन लिखती हैं। इस कविता का शीर्षक ”समवेत स्वर” ही अपने आप मे जबरदस्त है। आपकी काव्य प्रतिभा को अभिवादन।

    1. सादर आभार ।आपके दो शब्द मुझमें असीम उर्जा का संचार करते हैं ।
      मैने जब इस मंच पर प्रवेश किया था तब सर्वश्रेष्ठ कवि से आप सम्मानित थी। मैंने आपकी रचनाओं का गहन अध्ययन किया ।
      सभी एक से बढ़कर एक और तब से ही आप मेरी सर्वोच्य बन गयी ।
      आपका सानिध्य पाना मेरे लिए सौभाग्य की बात है ।आप हर क्षेत्र में सफलता के सर्वोच्य शिखर पर आसीन हो !

      1. अरे ! यह तो बहुत हो गया मैम मैं तो आपकी प्रशंसक हूँ..
        चलो अच्छा है हम दोनो एक दूसरे को पसंद करते हैं बहुत बहुत आभार

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