सरगम

मन में मेरे आज एक,
सरगम सी बज रही है
पुष्पित हुआ है हृदय,
सुगंधि सी आ रही है
कोई, कहीं दूर से मुझको,
याद कर रहा है
उसको कोई बतादे,
वो भी याद आ रहा है..

*****✍️गीता

Comments

13 responses to “सरगम”

  1. वाह हनी सिंह का गाना याद आ गया..
    “कल परसों दी मैनू एक नंबरा कॉल अउंदी है
    मैनू लगदा है मेरी सहेली मैनु फोन मिलौंदी है”
    बहुत लाजवाव अभिव्यक्ति

    1. Geeta kumari

      शुक्रिया प्रज्ञा जी

  2. Suman Kumari

    बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति ।
    सच कहा आपने अक्सर
    “हमें जिसकी कमी महसूस होती है
    वे भी हमारी यादों से परेशा होते हैं “

  3. बिलकुल सही कहा आपने
    सुन्दर अभिव्यक्ति है ।
    “अकसर हम जिन्हें याद करते हैं
    वे भी हमारी यादों से परेशा होते हैं ”

  4. Geeta kumari

    धन्यवाद जी, लेकिन यादों से परेशान का तो कोई ज़िक्र नहीं है कविता में।क्या पता कोई याद कर के खुश हो रहा हो

  5. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर भाव

    1. Geeta kumari

      भाव को समझने और एक सही समीक्षा करने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया भाई जी सादर आभार🙏🙏

  6. कवि गीता जी की इस कविता में बहुत ही सुखद स्नेह की अभिव्यक्ति है जिसमें गम का लेश मात्र न होकर प्रफुल्लित मन की प्रफुल्लित अभिव्यक्ति हुई है। यह कवि गीता जी की लेखनी की सुरम्य विशेषता है। रूमानी अंदाज, कोमल अभिव्यक्ति ऐसा गीता जी ही कर सकती हैं। वाह, याद करने की सौंधी खुशबू और फिर उसे दूसरी तरफ से भी याद का संदेश भेजा जाना बहुत ही बेहतरीन है। भाषा व शिल्प भी अतिउत्तम है

    1. Geeta kumari

      इतनी सुन्दर समीक्षा के लिए आपका बहुत सारा धन्यवाद सतीश जी
      आपके कवि हृदय ने एक कवि की भावानुभूति को बहुत अच्छी तरह से समझा है । इसके लिए आपका हार्दिक धन्यवाद सर 🙏

  7. बहुत शानदार लिखा है वाह

    1. Geeta kumari

      कविता की सराहना के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद जोशी जी🙏

  8. वाह मैम अतीव सुन्दर

    1. Geeta kumari

      Thanks for your precious compliment Piyush ji.

Leave a Reply

New Report

Close