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  1. शब्द चाहे सरल हों,
    या फिर हों जटिल
    हृदय को करें प्रसन्न
    तो अर्थ है,
    वरना सब व्यर्थ है।
    ——– कवि गीता जी की बहुत सुन्दर पंक्तियाँ। कथ्य व शिल्प दोनों ही बेहतरीन हैं।

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