*सरस्वती विद्यमान है*

शब्द चाहे सरल हों,
या फिर हों जटिल
हृदय को करें प्रसन्न
तो अर्थ है,
वरना सब व्यर्थ है।
यदि आपके शब्द,
किसी के ह्रदय को करें स्पर्श
तो समझो वाणी और कलम में,
सरस्वती विद्यमान है..
वरना बोलती तो सभी की ज़ुबान है।।
_____✍️गीता

Comments

6 responses to “*सरस्वती विद्यमान है*”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर भाव

    1. Geeta kumari

      बहुत-बहुत धन्यवाद भाई जी🙏

  2. Satish Pandey

    शब्द चाहे सरल हों,
    या फिर हों जटिल
    हृदय को करें प्रसन्न
    तो अर्थ है,
    वरना सब व्यर्थ है।
    ——– कवि गीता जी की बहुत सुन्दर पंक्तियाँ। कथ्य व शिल्प दोनों ही बेहतरीन हैं।

    1. Geeta kumari

      उत्साहवर्धक और सुंदर समीक्षा हेतु हार्दिक धन्यवाद सतीश जी ।

  3. सही कहा आपने
    बहुत सुन्दर

    1. Geeta kumari

      बहुत-बहुत धन्यवाद अनु जी

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